डोंबिवली के नगर निगम अस्पताल में डॉक्टरों से कथित मारपीट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना पार्षद Ramesh Mhatre और तीन सह-आरोपियों को जमानत दी है। अदालत ने महाराष्ट्र से बाहर रहने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने और मुकदमे की सुनवाई Fast-Track Mode में कराने जैसी सख्त शर्तें लगाई हैं।
मुंबई। डोंबिवली के शास्त्री नगर नगर निगम अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर कथित हमले के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने शुक्रवार, 7 अगस्त को म्हात्रे और तीन अन्य आरोपियों को सशर्त जमानत देने का आदेश दिया।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केवल जमानत देकर मामला नहीं छोड़ा, बल्कि पुलिस जांच और Trial के लिए विस्तृत Timeline भी तय की है। केस को Fast-Track Mode में चलाने, अनुभवी Special Public Prosecutor नियुक्त करने और पीड़ित डॉक्टरों को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
महाराष्ट्र से बाहर रहना होगा
जमानत की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि म्हात्रे और उनके साथ जमानत पाने वाले आरोपी फिलहाल महाराष्ट्र में नहीं रह सकेंगे। LiveLaw की रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों को Chargesheet दाखिल होने तक महाराष्ट्र से बाहर रहना होगा और जिस राज्य में वे रहेंगे, वहां के स्थानीय पुलिस स्टेशन में सप्ताह में तीन बार उपस्थित होना होगा।
Times of India की विस्तृत कोर्ट रिपोर्ट में यह प्रतिबंध Criminal Trial शुरू होने तक बताया गया है। चारों आरोपियों ने अदालत को जानकारी दी कि वे इस अवधि में गोवा में रहेंगे। म्हात्रे ने North Goa के एक Resort का पता दिया, जबकि अन्य तीन आरोपी नजदीकी Guest House में रहने वाले हैं।
इसलिए उपलब्ध रिपोर्टों में प्रतिबंध की अंतिम अवधि को लेकर मामूली अंतर है, लेकिन यह स्पष्ट है कि रिहाई के तुरंत बाद आरोपियों के महाराष्ट्र लौटने पर रोक रहेगी।
जमानत के साथ और कौन-कौन सी शर्तें?
हाईकोर्ट ने आरोपियों के लिए कई सख्त शर्तें निर्धारित की हैं। अदालत के निर्देश के अनुसार वे जांच में हस्तक्षेप या गवाहों को प्रभावित नहीं कर सकेंगे और अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जा सकेंगे।
म्हात्रे को अपना Passport जमा कराने का भी निर्देश दिया गया है। अन्य तीन आरोपियों ने अदालत को बताया कि उनके पास Passport नहीं है। इसके अलावा आरोपियों को इसी प्रकार का कोई अपराध नहीं करने और मुकदमे को जानबूझकर लंबा नहीं खींचने का निर्देश दिया गया।
अदालत ने Defence और Prosecution दोनों को अनावश्यक या मामूली कारणों से Adjournment मांगने से भी बचने को कहा है।
Fast-Track Trial का आदेश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई तेज करने के लिए अपनी Registry को एक सप्ताह के भीतर कल्याण की अदालतों से एक Judge नियुक्त करने का निर्देश दिया है, जो इस मुकदमे को Fast-Track आधार पर सुनेगा।
इसलिए इसे केवल “मामला Fast-Track Court में Transfer कर दिया गया” कहना पूरी तरह सटीक नहीं होगा। अदालत ने वास्तव में Fast-Track Trial के लिए विशेष Judge नियुक्त करने और समयबद्ध सुनवाई कराने का निर्देश दिया है।
राज्य सरकार को अनुभवी Special Public Prosecutor नियुक्त करने के लिए भी कहा गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियुक्त Prosecutor को मुकदमा पूरा होने तक बीच में बदला नहीं जाना चाहिए।
Chargesheet के लिए भी Timeline तय
सरकारी पक्ष ने हाईकोर्ट को बताया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और Chargesheet जल्द दाखिल की जा सकती है। तीन गवाहों के बयान Magistrate के सामने दर्ज होना अभी बाकी बताया गया।
अदालत ने निर्देश दिया कि Voice और Video Samples तीन Working Days के भीतर State Forensic Laboratory भेजे जाएं। Forensic Report करीब 10 दिन में प्राप्त होने के बाद पांच दिन के भीतर Chargesheet दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी की जाए। इसके बाद सात दिनों के भीतर आरोप तय करने का निर्देश दिया गया है।
यह Timeline बताती है कि हाईकोर्ट इस मामले को लंबी अवधि तक लंबित नहीं रहने देना चाहता।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी—लोकतंत्र के ताने-बाने पर असर
जमानत देते समय हाईकोर्ट ने निर्वाचित प्रतिनिधियों के आचरण को लेकर गंभीर टिप्पणी भी की।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे ने कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचित प्रतिनिधि जनता द्वारा और जनता के लिए चुने जाते हैं। यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि अपने ही मतदाताओं पर हमला करने का आरोपी हो तो ऐसी घटना लोकतांत्रिक व्यवस्था के ताने-बाने को नुकसान पहुंचाती है।
अदालत पहले की सुनवाई में भी म्हात्रे के कथित व्यवहार पर नाराजगी जता चुकी है और सवाल किया था कि क्या निर्वाचित प्रतिनिधि बनने के बाद लोगों पर Files और Chairs से हमला करना स्वीकार्य हो सकता है।
क्या था डोंबिवली अस्पताल हमला मामला?
मामला 6 जुलाई 2026 की रात का है। डोंबिवली में Kalyan-Dombivli Municipal Corporation के शास्त्री नगर अस्पताल में एक नवजात बच्चे को NICU Bed उपलब्ध नहीं होने के कारण दूसरे अस्पताल में Transfer करने की सलाह दी गई थी। इसके बाद विवाद बढ़ गया।
पुलिस के मुताबिक रमेश म्हात्रे और उनके साथ मौजूद लोगों पर डॉक्टरों तथा अन्य मेडिकल स्टाफ से मारपीट का आरोप है। घटना के CCTV और Video सामने आने के बाद मामला व्यापक चर्चा में आया।
अभियोजन के अनुसार अस्पताल के Labour Ward में एक महिला डॉक्टर और दो पुरुष डॉक्टरों के साथ मारपीट हुई थी। हाईकोर्ट ने अपने पहले आदेश में महिला डॉक्टर पर हमले को विशेष रूप से गंभीर माना था।
म्हात्रे और अन्य आरोपियों ने अभी इन आरोपों पर Trial का सामना करना है और उन्हें किसी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है।
8 जुलाई को हुई थी गिरफ्तारी
घटना के दो दिन बाद 8 जुलाई को रमेश म्हात्रे को गिरफ्तार किया गया। उपलब्ध समकालीन रिपोर्टों के अनुसार उनके साथ तीन सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया था।
इसलिए मूल विवरण में “चार सहयोगियों के साथ गिरफ्तार” लिखने के बजाय “म्हात्रे और उनके तीन सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया” लिखना मौजूदा प्रमुख रिपोर्टों के अनुसार अधिक सटीक है।
बाद में मामले से जुड़ी एक महिला आरोपी की गिरफ्तारी की भी सूचना सामने आई थी।
14 जुलाई को मिली थी पहली जमानत
कल्याण की Magistrate Court ने 14 जुलाई को रमेश म्हात्रे को ₹50,000 के Surety Bond पर जमानत दे दी थी। उस समय पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए डॉक्टरों की सुरक्षा और म्हात्रे के पुराने मामलों का मुद्दा उठाया था।
म्हात्रे गिरफ्तारी के बाद स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों के कारण अस्पताल में भर्ती भी रहे थे। पुलिस ने उस समय High Blood Pressure, Kidney और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी दी थी।
हाईकोर्ट ने खुद लिया था संज्ञान
Magistrate Court से जमानत मिलने के बाद मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा। 18 जुलाई को शनिवार की विशेष सुनवाई में हाईकोर्ट ने Suo Motu Cognisance लेते हुए निचली अदालत के Bail Order पर रोक लगा दी।
खंडपीठ ने अपराध की गंभीरता और निचली अदालत के आदेश में दिखाई देने वाली खामियों का उल्लेख किया था। म्हात्रे को अगले दिन पुलिस के सामने Surrender करने को कहा गया।
म्हात्रे ने 19 जुलाई को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उन्हें फिर Judicial Custody में भेज दिया गया।
डॉक्टरों को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश
हाईकोर्ट ने राज्य को इस मामले में तीन डॉक्टरों को पर्याप्त Police Protection उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सुरक्षा तब तक जारी रखने को कहा गया है जब तक डॉक्टर खुद सुरक्षित महसूस नहीं करते और Threat Perception समाप्त नहीं हो जाता।
अदालत ने KDMC को यह भी निर्देश दिया कि घटना के बाद Duty पर नहीं आने वाले डॉक्टरों के खिलाफ इस अवधि के लिए कोई Disciplinary Action न लिया जाए।
घटना के बाद चिकित्सा समुदाय ने विरोध किया था और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए थे। डॉक्टरों और कर्मचारियों के विरोध के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का आश्वासन दिया था।
डॉक्टरों के इस्तीफे का मुद्दा भी कोर्ट में
हाईकोर्ट को बताया गया कि कथित हमले के बाद एक महिला डॉक्टर और शिकायतकर्ता डॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया था। KDMC ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार नहीं किए। अदालत ने Corporation से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा।
High Court ने पहले की सुनवाई में इस बात पर भी चिंता जताई थी कि एक महिला डॉक्टर कथित हमले के बाद डर के कारण नौकरी छोड़ने की स्थिति तक पहुंच गई।
पुराने आपराधिक मामलों पर क्या तथ्य है?
म्हात्रे के आपराधिक इतिहास को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग संख्या सामने आई है। घटना के शुरुआती दिनों में Times of India ने पुलिस के हवाले से उनके खिलाफ 12 अन्य मामले होने की जानकारी दी थी, जबकि बाद की कार्यवाही में इससे अधिक मामलों का उल्लेख किया गया।
इसलिए “18 मामले और 17 में बरी” जैसे आंकड़े को अदालती रिकॉर्ड देखे बिना अंतिम तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। यह जरूर स्पष्ट है कि अभियोजन ने उनकी Previous Criminal Antecedents का मुद्दा जमानत कार्यवाही के दौरान उठाया था।
जमानत का मतलब आरोप खत्म होना नहीं
बॉम्बे हाईकोर्ट का ताजा आदेश रमेश म्हात्रे या अन्य आरोपियों को मामले से बरी नहीं करता। Bail केवल Trial के दौरान हिरासत से सशर्त रिहाई है।
अदालत ने आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र से बाहर रहने, गवाहों से दूरी बनाए रखने, Passport जमा कराने और Trial में देरी नहीं करने जैसी शर्तें लगाई हैं। इसके साथ ही Fast-Track Trial का आदेश बताता है कि हाईकोर्ट अब मामले का जल्द न्यायिक निष्कर्ष चाहता है।
खबर के मुख्य बिंदु
- रमेश म्हात्रे और तीन सह-आरोपियों को Bombay High Court से Bail
- महाराष्ट्र से बाहर रहने की सख्त शर्त
- दूसरे राज्य के Police Station में सप्ताह में तीन बार Reporting
- म्हात्रे को Passport जमा कराना होगा
- गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्य से छेड़छाड़ पर रोक
- Trial को Fast-Track करने का आदेश
- Special Public Prosecutor नियुक्त होगा
- डॉक्टरों को Police Protection देने का निर्देश
- 6 जुलाई को Shastri Nagar Hospital में कथित हमला
- म्हात्रे 8 जुलाई को गिरफ्तार हुए थे
- 14 जुलाई की पहली जमानत पर High Court ने बाद में रोक लगाई थी




