अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर यह विशेष रिपोर्ट उन युवाओं की आवाज़ को सामने लाती है, जो रोजगार, परीक्षाओं, अवसरों और अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर सवाल पूछ रहे हैं। लाठीचार्ज, आंसू गैस और बैरिकेड के बीच भी युवाओं की उम्मीद और संघर्ष जारी है। यह कहानी सिर्फ प्रदर्शन की नहीं, उस पीढ़ी की है जो डिग्री लेकर नौकरी का इंतजार कर रही है और अपने वर्तमान का हिसाब मांग रही है। सवाल यही है—अगर युवा देश का भविष्य हैं, तो उनके आज, उनके सपनों और उनके अधिकारों की जिम्मेदारी कौन लेगा?




