अलवर Cyber थाना पुलिस ने गुजरात के पंचमहल निवासी कौशिक कुमार दर्जी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार उसके बैंक खाते में ठगी के ₹32.80 लाख पहुंचे थे। इसी मामले में एक अन्य आरोपी मयूर कुमार प्रजापति को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसके खाते में ₹16.69 लाख से अधिक की रकम आई थी।
अलवर। शेयर बाजार में निवेश कर मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से ₹49 लाख 49 हजार 139 की कथित Cyber Fraud के मामले में अलवर Cyber थाना पुलिस ने गुजरात से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस मामले में पैसों के लेन-देन और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान कौशिक कुमार दर्जी (50) निवासी नवापुरा, थाना कालोल, जिला पंचमहल, गुजरात के रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता से ठगी गई रकम में से ₹32.80 लाख उस बैंक खाते में पहुंचे थे, जिसे पुलिस कौशिक कुमार से जुड़ा बता रही है।
इसी मामले में गुजरात के विसनगर, जिला महसाणा निवासी मयूर कुमार गुनवंत भाई प्रजापति (28) को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के मुताबिक उसके खाते में ₹16 लाख 69 हजार 139 प्राप्त हुए थे। दोनों खातों में पहुंची रकम को जोड़ने पर कुल राशि ठीक ₹49,49,139 होती है, जो शिकायत में बताई गई कुल ठगी की रकम के बराबर है।
कैसे शुरू हुआ कथित निवेश का जाल?
पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी के हवाले से जारी जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने Cyber थाने में FIR दर्ज कराई थी। परिवादी का आरोप है कि ‘पवन ब्रोकरेज’ से जुड़े बताए गए पवन भाई और राहुल ने उसे Demat Account खुलवाकर शेयर बाजार में निवेश करने पर अच्छा मुनाफा दिलाने का भरोसा दिया।
आरोप है कि इसके बाद अलग-अलग तरीके से निवेश के लिए रकम जमा कराई जाती रही और कुल ₹49.49 लाख से अधिक की राशि चली गई।
यहां महत्वपूर्ण है कि पवन भाई और राहुल की पहचान, Brokerage की वैधानिक स्थिति और गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों से उनके संबंधों की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इस स्तर पर यह कहना उचित नहीं होगा कि गिरफ्तार आरोपी ही पूरे गिरोह के Mastermind हैं। पुलिस अभी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।
₹32.80 लाख एक खाते में मिलने का दावा
Bank Transaction Trail की जांच के दौरान पुलिस को कथित Cyber Fraud की रकम अलग-अलग खातों में जाने की जानकारी मिली। इसी प्रक्रिया में कौशिक कुमार दर्जी से जुड़े खाते की पहचान हुई।
पुलिस का दावा है कि शिकायतकर्ता द्वारा निवेश के नाम पर भेजे गए धन में से ₹32,80,000 इस खाते में पहुंचे। इसके आधार पर अलवर Cyber थाना पुलिस की टीम गुजरात पहुंची और कौशिक कुमार को गिरफ्तार किया।
अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैंक खाते का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया, खाते का संचालन वास्तव में कौन कर रहा था और रकम प्राप्त होने के बाद उसे आगे कहां Transfer किया गया।
सिर्फ किसी खाते में रकम पहुंचना अपने आप में पूरे अपराध में व्यक्ति की भूमिका का अंतिम प्रमाण नहीं होता। आरोपी की वास्तविक भूमिका जांच, Digital Evidence और बाद की न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।
पहले आरोपी के खाते में आए थे ₹16.69 लाख
मामले में इससे पहले गिरफ्तार मयूर कुमार प्रजापति के बैंक खाते में पुलिस ने ₹16,69,139 की कथित ठगी की रकम पहुंचने की जानकारी दी थी।

इस प्रकार जांच में सामने आए दोनों खातों का विवरण है:
| आरोपी | स्थान | खाते में पहुंची कथित रकम |
|---|---|---|
| कौशिक कुमार दर्जी | पंचमहल, गुजरात | ₹32,80,000 |
| मयूर कुमार प्रजापति | महसाणा, गुजरात | ₹16,69,139 |
| कुल | ₹49,49,139 |
पुलिस अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि क्या इन खातों के अलावा भी रकम आगे अन्य Bank Accounts, Wallets या दूसरे माध्यमों में भेजी गई थी।
क्या ये ‘Mule Accounts’ थे?
Cyber Fraud के मामलों में अपराधी अक्सर रकम प्राप्त करने के लिए कई Bank Accounts का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन मौजूदा मामले में अलवर पुलिस की जारी सूचना में इन खातों को औपचारिक रूप से Mule Accounts घोषित किए जाने की जानकारी नहीं है।
इसलिए जांच पूरी होने से पहले गिरफ्तार आरोपियों को केवल “Account Provider” या “Mule Account Holder” बताना भी जल्दबाजी होगी।
पुलिस को यह स्थापित करना होगा कि खाताधारकों को रकम के स्रोत की जानकारी थी या नहीं, उन्हें इसके बदले कोई Commission मिला या नहीं और क्या वे कथित ठगी करने वाले लोगों के संपर्क में थे।
पवन ब्रोकरेज की भी होगी जांच
मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल उस इकाई की वास्तविक पहचान है, जिसे शिकायतकर्ता ने ‘पवन ब्रोकरेज’ बताया है।
जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि:
- क्या ‘पवन ब्रोकरेज’ वास्तव में कोई Registered Brokerage Entity है?
- क्या आरोपियों ने किसी वास्तविक Brokerage के नाम का दुरुपयोग किया?
- Demat Account किसी अधिकृत Depository Participant के माध्यम से खोला गया था या केवल ऐसा दिखाया गया?
- रकम वास्तविक Trading Account में गई या निजी Bank Accounts में?
- शिकायतकर्ता को कोई Fake Trading Dashboard या Profit Statement दिखाया गया था या नहीं?
- पवन भाई और राहुल की वास्तविक पहचान क्या है?
- गिरफ्तार दोनों लोगों से उनका संपर्क किस माध्यम से था?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही Cyber Fraud के पूरे Modus Operandi की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
SEBI लगातार कर रहा ऐसे Investment Scams से सावधान
यह Cyber Fraud का मामला ऐसे समय सामने आया है जब SEBI ने निवेशकों को Fake Trading Apps और Guaranteed Return वाले Investment Scams के प्रति बार-बार आगाह किया है।
SEBI के अनुसार ऐसे मामलों में ठग अक्सर Social Media, WhatsApp या Telegram के जरिए निवेशकों से संपर्क करते हैं, खुद को Market Expert या Registered Entity बताते हैं और बहुत अधिक या लगभग निश्चित Return का दावा करते हैं। बाद में Fake Trading Platform पर काल्पनिक Profit दिखाकर निवेशक को और पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
SEBI ने साफ कहा है कि Securities Market में Guaranteed या Risk-Free Return का दावा अपने आप में बड़ा Red Flag है। निवेशकों को किसी भी व्यक्ति या संस्था को रकम देने से पहले यह देखना चाहिए कि वह SEBI के साथ Registered है या नहीं और Trading केवल अधिकृत Apps के माध्यम से की जानी चाहिए।
शेयर बाजार निवेश में ये संकेत दिखें तो रहें सावधान
किसी अनजान व्यक्ति की ओर से WhatsApp या Telegram पर Stock Tips भेजना, कम समय में असामान्य रूप से बड़ा Profit देने का दावा करना, किसी निजी Bank Account में पैसे जमा करने को कहना या Official App Store के बाहर से APK File डाउनलोड करवाना संभावित धोखाधड़ी के संकेत हो सकते हैं।
SEBI निवेशकों को Registered Intermediary की जानकारी जांचने और किसी दूसरे व्यक्ति के साथ Trading Account Credentials साझा नहीं करने की सलाह देता है। फरवरी 2026 में भी नियामक ने ऐसे कथित Account Handlers से सावधान किया था जो Risk-Free Profit का दावा करते हैं।
Cyber Fraud होने पर तुरंत क्या करें?
Financial Cyber Fraud होने पर समय महत्वपूर्ण होता है। गृह मंत्रालय के Indian Cybercrime Coordination Centre के अनुसार पीड़ित 1930 National Cybercrime Helpline पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं और National Cyber Crime Reporting Portal पर भी मामला Report किया जा सकता है। यह व्यवस्था Banks और Payment Intermediaries के साथ मिलकर ठगी की रकम के आगे Transfer को रोकने में मदद करने के लिए बनाई गई है।
पीड़ित को Transaction ID, Bank Account Details, WhatsApp Chat, Phone Number, Screenshot, Trading App या Website की जानकारी और भुगतान से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने चाहिए।
अलवर पुलिस लगातार चला रही Cyber अपराधियों के खिलाफ अभियान
अलवर पुलिस हाल के दिनों में Cyber Crime के खिलाफ विशेष कार्रवाई कर रही है। पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने हाल में बताया था कि 20 जुलाई से 4 अगस्त तक चले विशेष अभियान में जिले में 33 Cyber Crime Cases दर्ज किए गए और 39 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने जिले में 191 Cyber Hotspots चिन्हित करने की भी जानकारी दी थी।
इसी अभियान में पुलिस ने Cyber Fraud से जुड़ी लाखों रुपये की रकम Hold कराने और पीड़ितों को कुछ राशि वापस दिलाने का भी दावा किया था।
मौजूदा ₹49.49 लाख के Share Market Fraud Case में भी जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर कथित Brokerage, अन्य Bank Accounts और नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
गिरफ्तारी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं
मामले में कौशिक कुमार दर्जी और मयूर कुमार प्रजापति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, लेकिन गिरफ्तारी को दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होगी।
इसी तरह शिकायत में जिन पवन भाई और राहुल का नाम लिया गया है, उनके खिलाफ पुलिस की ताजा कार्रवाई या गिरफ्तारी की सूचना अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए उन्हें दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
खबर के मुख्य बिंदु
- अलवर में Share Market Investment के नाम पर ₹49,49,139 की कथित Cyber Fraud।
- गुजरात के पंचमहल से कौशिक कुमार दर्जी गिरफ्तार।
- उसके Bank Account में ₹32.80 लाख पहुंचने का पुलिस का दावा।
- मयूर कुमार प्रजापति को पहले गिरफ्तार कर चुकी है पुलिस।
- मयूर के खाते में ₹16,69,139 पहुंचने की जानकारी।
- दोनों खातों में आई रकम का योग पूरी कथित ठगी की राशि के बराबर।
- शिकायतकर्ता ने ‘पवन ब्रोकरेज’ से जुड़े बताए गए पवन भाई और राहुल पर निवेश का झांसा देने का आरोप लगाया।
- पूरे नेटवर्क और रकम के आगे के Transaction की जांच जारी।




