
राजस्थान की राजनीति में इन दिनों Ashok Gehlot on Forth Time Chief Minister सबसे चर्चित मुद्दों में शामिल है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं, कांग्रेस के भीतर चल रही चर्चाओं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ रिश्तों और बीजेपी द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर विस्तार से अपनी बात रखी। गहलोत ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला केवल कांग्रेस हाईकमान करता है और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
मुख्य बातें
- अशोक गहलोत ने चौथी बार सीएम बनने के सवाल पर दिया स्पष्ट जवाब।
- कहा- मुख्यमंत्री का फैसला केवल कांग्रेस हाईकमान करता है।
- कार्यकर्ताओं की ‘चौथी बार गहलोत सरकार’ नारेबाजी पर दी सफाई।
- गोविंद सिंह डोटासरा का किया बचाव।
- बीजेपी पर झूठा नैरेटिव फैलाने का लगाया आरोप।
- कांग्रेस में गुटबाजी के आरोपों को बताया विपक्ष का प्रचार।
- लोकतंत्र बचाने के लिए राजस्थान में कांग्रेस सरकार जरूरी बताई।
क्या बोले अशोक गहलोत?
Ashok Gehlot on Forth Time Chief Minister को लेकर पूछे गए सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वे लंबे समय से कार्यकर्ताओं से ऐसे नारे नहीं लगाने की अपील करते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार कार्यकर्ता उत्साह में नारे लगा देते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मुख्यमंत्री बनने का फैसला किसी नेता या समर्थकों द्वारा किया जाएगा। यह पूरी तरह कांग्रेस हाईकमान का अधिकार है।
गहलोत ने कहा कि जब केवल उनके समर्थन में नारे लगते हैं तो उन्हें स्वयं संकोच महसूस होता है क्योंकि पार्टी में कई वरिष्ठ नेता साथ चलते हैं।
Ashok Gehlot on Forth Time Chief Minister पर क्या बोले गहलोत?
मीडिया ने जब पूछा कि क्या उन्हें चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की संभावना पर भरोसा है, तो गहलोत ने कहा कि यह विषय उनके हाथ में नहीं है।
उन्होंने कहा—
“मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका निर्णय हाईकमान करता है। चुनाव से पहले और बाद में पार्टी लगातार सर्वे कराती है। जनता का मूड, विधायकों की राय और संगठन की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाता है।”
उन्होंने बताया कि अब कांग्रेस में संस्थागत स्तर पर सर्वे की व्यवस्था मजबूत की गई है और राहुल गांधी की टीम भी लगातार फीडबैक जुटाती रहती है।
डोटासरा के साथ विवाद पर क्या बोले?
हाल के दिनों में कांग्रेस के भीतर उस समय चर्चा तेज हो गई थी जब पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय और उनके समर्थकों ने गहलोत के आवास पर पहुंचकर ‘चौथी बार गहलोत सरकार’ के नारे लगाए।
इसके बाद पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा था कि कांग्रेस किसी व्यक्ति विशेष की ब्रांडिंग से नहीं चलती बल्कि संगठन सबसे ऊपर है।
इस पर Ashok Gehlot on Forth Time Chief Minister मामले में प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि डोटासरा के खिलाफ विपक्ष जानबूझकर गलत धारणा बना रहा है।
बीजेपी पर साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल कांग्रेस नेताओं को आपस में लड़ाना है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी लगातार झूठा नैरेटिव तैयार कर रही है ताकि कांग्रेस संगठन कमजोर दिखाई दे।
गहलोत ने कहा कि उन्होंने कभी भी डोटासरा पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया।
उन्होंने याद दिलाया कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के मुद्दे पर सार्वजनिक मंच से चर्चा हुई थी, लेकिन किसी ने भी डोटासरा के खिलाफ कोई प्रमाण नहीं दिया।
‘कार्यकर्ताओं की भावना को नहीं रोक सकते’
Ashok Gehlot on Forth Time Chief Minister विवाद के बीच गहलोत ने कहा कि कार्यकर्ता अपने नेता के प्रति जो भावना रखते हैं, उसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता उत्साह में नारे लगाते हैं लेकिन अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व का होता है।
कांग्रेस हाईकमान कैसे तय करता है मुख्यमंत्री?
गहलोत ने बताया कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया पूरी तरह संस्थागत है।
इसके लिए कई पहलुओं पर विचार किया जाता है—
- चुनाव पूर्व सर्वे
- चुनाव बाद सर्वे
- जनता का मूड
- जीतकर आए विधायकों की राय
- संगठन की रिपोर्ट
- केंद्रीय नेतृत्व की समीक्षा
उन्होंने कहा कि इसी आधार पर अंतिम फैसला लिया जाता है।
लोकतंत्र बचाने के लिए कांग्रेस जरूरी
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनना केवल पार्टी के लिए नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान से कांग्रेस ने 11 सीटें जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत भूमिका निभाई।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछली बार कुछ कारणों से कांग्रेस सरकार नहीं बना सकी, जबकि जनता में माहौल अनुकूल था।
गहलोत-डोटासरा विवाद कैसे शुरू हुआ?
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय अपने समर्थकों के साथ अशोक गहलोत के आवास पहुंचे।
वहां समर्थकों ने ‘चौथी बार गहलोत सरकार’ के नारे लगाए।
बाद में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा—
“मैं किसी व्यक्ति की ब्रांडिंग के लिए काम नहीं करता। कांग्रेस संगठन सबसे पहले है। व्यक्ति पूजा के कारण ही कई बार पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता है।”
इसके बाद दोनों नेताओं के बीच मतभेद की चर्चाएं तेज हो गईं।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि Ashok Gehlot on Forth Time Chief Minister को लेकर उठी चर्चा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के अंदर नेतृत्व को लेकर चल रही बहस का हिस्सा है।
हालांकि गहलोत के ताजा बयान से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि वे सार्वजनिक रूप से हाईकमान के फैसले को सर्वोपरि मान रहे हैं और संगठनात्मक एकता का संदेश देना चाहते हैं।
Ashok Gehlot on Forth Time Chief Minister को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री बनने या न बनने का निर्णय केवल कांग्रेस हाईकमान का होता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं की नारेबाजी को स्वाभाविक बताया, गोविंद सिंह डोटासरा का बचाव किया और बीजेपी पर कांग्रेस के भीतर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। आने वाले समय में राजस्थान कांग्रेस की रणनीति और नेतृत्व को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।




