हृदयाघात के बाद अजमेर ले जाते समय रास्ते में ली अंतिम सांस; वर्ष 2008 में मसूदा से निर्दलीय चुनाव जीतकर बने थे विधायक और संसदीय सचिव
जयपुर। राजस्थान के पूर्व विधायक, पूर्व संसदीय सचिव और वरिष्ठ कांग्रेस नेता ब्रह्मदेव कुमावत का हृदयाघात के कारण निधन हो गया। सोमवार, 27 जुलाई को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अजमेर जिले के नसीराबाद स्थित अस्पताल ले जाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें अजमेर रेफर किया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से मसूदा विधानसभा क्षेत्र सहित अजमेर जिले के राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर है।
अजमेर जिले के बांदनवाड़ा निवासी ब्रह्मदेव कुमावत की पहचान जमीन से जुड़े और आम लोगों के बीच सक्रिय रहने वाले नेता के रूप में थी। उन्होंने विधायक और संसदीय सचिव के रूप में मसूदा क्षेत्र के विकास तथा जनहित से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया।
अचानक बिगड़ी तबीयत
प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार को ब्रह्मदेव कुमावत की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। परिजन उन्हें पहले नसीराबाद के उपजिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल रेफर किया गया।
अजमेर ले जाते समय रास्ते में ही उनका निधन हो गया। चिकित्सकीय जानकारी और परिजनों के अनुसार उनके निधन का कारण हृदयाघात बताया गया है। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को पैतृक गांव बांदनवाड़ा में किए जाने की जानकारी सामने आई।
2008 में निर्दलीय चुनाव जीतकर पहुंचे विधानसभा
ब्रह्मदेव कुमावत का राजनीतिक सफर संघर्ष और स्थानीय जनसमर्थन से जुड़ा रहा। वर्ष 2008 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने मसूदा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया।
उन्होंने चुनाव में 42,170 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की और पहली बार राजस्थान विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार को हराकर निर्दलीय विधायक बनने की उनकी सफलता उस समय मसूदा क्षेत्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर मानी गई थी।
विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कुमावत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया। इसके बाद उन्हें राज्य सरकार में संसदीय सचिव नियुक्त किया गया था।
कांग्रेस में शामिल होकर सक्रिय रहे
निर्दलीय विधायक के रूप में कार्यकाल पूरा करने के बाद ब्रह्मदेव कुमावत कांग्रेस से जुड़ गए। वर्ष 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में उन्होंने मसूदा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा प्रत्याशी सुशील कंवर से हार गए।
इसके बावजूद वह सक्रिय राजनीति और कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे। वर्ष 2018 के चुनाव में भी उन्होंने टिकट के लिए दावेदारी की थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व के निर्देश के बाद चुनाव नहीं लड़ा और संगठन के लिए काम करते रहे।
क्षेत्रीय विकास को दी प्राथमिकता
विधायक और संसदीय सचिव रहते हुए ब्रह्मदेव कुमावत ने मसूदा क्षेत्र में सड़क, पेयजल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया। स्थानीय लोगों के बीच उनकी छवि सरल, मिलनसार और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील नेता की रही।
वह विशेष रूप से अजमेर संभाग और कुमावत समाज में प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। समर्थकों के अनुसार वह क्षेत्र के लोगों से सीधे संवाद करने और उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए जाने जाते थे।
विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने जताया शोक
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने ब्रह्मदेव कुमावत के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। राजस्थान विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 28 जुलाई को पूर्व संसदीय सचिव और मसूदा के पूर्व विधायक के निधन पर विधानसभा अध्यक्ष का शोक संदेश प्रकाशित किया गया।
देवनानी ने कहा कि ब्रह्मदेव कुमावत का निधन सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने विधायक और संसदीय सचिव के रूप में क्षेत्र तथा प्रदेश की सेवा करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में कुमावत ने सदैव जनहित के विषयों को प्राथमिकता दी और अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन किया। विधानसभा अध्यक्ष ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
कांग्रेस नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी पूर्व विधायक के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कुमावत के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके निधन को राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति बताया।
पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी ब्रह्मदेव कुमावत के निधन पर शोक प्रकट किया है।
मसूदा की राजनीति में छोड़ी अलग पहचान
Brahmdev Kumawat Death की खबर से मसूदा, बांदनवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल है। वर्ष 2008 में पार्टी का टिकट नहीं मिलने के बावजूद निर्दलीय चुनाव जीतना उनके स्थानीय प्रभाव और जनता के बीच स्वीकार्यता को दर्शाता है।
निर्दलीय विधायक से संसदीय सचिव बनने और बाद में कांग्रेस संगठन के साथ सक्रिय रहने तक उनका राजनीतिक जीवन कई उतार-चढ़ावों से गुजरा। क्षेत्र के लोग उन्हें ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में याद कर रहे हैं, जिसने स्थानीय मुद्दों और जनता से संपर्क को अपनी राजनीति का आधार बनाया।




