BRICS Summit 2026: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच नई दिल्ली इस समय दुनिया की बड़ी कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर को भारत पहुंचेंगे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत की मेजबानी में होने वाला BRICS मंच मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने या भविष्य के युद्धविराम की दिशा में कोई रास्ता खोल सकता है?
BRICS Summit 2026 के लिए ईरान के राष्ट्रपति दिल्ली पहुंचे
BRICS Summit 2026 में सबसे ज्यादा नजर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मौजूदगी पर है। वह शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंच गए। यह उनकी ईरानी राष्ट्रपति के तौर पर पहली भारत यात्रा है और ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़ा सैन्य संघर्ष BRICS के भीतर भी मतभेद पैदा कर रहा है।
पेजेश्कियन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच मिडिल ईस्ट की स्थिति, द्विपक्षीय संबंध, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है।
31 अगस्त को SCO Summit के दौरान मोदी और पेजेश्कियन की मुलाकात में भी प्रधानमंत्री ने कहा था कि क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान बातचीत और diplomacy से होना चाहिए तथा स्थायी शांति और स्थिरता के प्रयास जारी रहने चाहिए।
BRICS Summit 2026: पुतिन भी दिल्ली पहुंचे, मोदी से होगी अहम बातचीत
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार तड़के नई दिल्ली पहुंच गए। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया। पुतिन की प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी तय है।
भारत-रूस बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे, लेकिन मिडिल ईस्ट और यूक्रेन युद्ध जैसी वैश्विक स्थितियों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति दोनों का एक ही समय दिल्ली में होना BRICS Summit 2026 को पश्चिम एशिया संकट के लिहाज से ज्यादा महत्वपूर्ण बना देता है।
BRICS Summit 2026: कल भारत पहुंचेंगे शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार, 12 सितंबर को भारत पहुंचेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने उनकी BRICS Summit में भागीदारी की आधिकारिक घोषणा की है।
यह शी जिनपिंग की 2019 के बाद पहली भारत यात्रा होगी।
उनकी यात्रा भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी बेहद अहम है। पहले यह स्पष्ट नहीं था कि प्रधानमंत्री मोदी और शी के बीच अलग bilateral meeting होगी या नहीं, लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि भारत और चीन दोनों नेता द्विपक्षीय बैठक की व्यवस्था पर काम कर रहे हैं।
इस बैठक में सीमा संबंधों और आर्थिक सहयोग के साथ-साथ मौजूदा international situation पर भी चर्चा संभव है।
BRICS Summit 2026 में क्यों छाया रहेगा मिडिल ईस्ट?
इस बार BRICS Summit 2026 की सबसे बड़ी geopolitical challenge पश्चिम एशिया का युद्ध है।
Reuters के मुताबिक फरवरी से जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने BRICS के अंदर भी मतभेद बढ़ाए हैं। ईरान स्वयं BRICS सदस्य है, वहीं UAE भी समूह का हिस्सा है और दोनों देशों के बीच मौजूदा संघर्ष को लेकर गंभीर तनाव पैदा हुआ है।
BRICS negotiators के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऐसी भाषा पर सहमति बनाना है जिसे ईरान और खाड़ी के दूसरे सदस्य स्वीकार कर सकें और summit के अंत में संयुक्त घोषणा संभव हो सके।
यानी Delhi Summit की सफलता का एक बड़ा पैमाना यह भी होगा कि 11 सदस्य देश मिडिल ईस्ट पर कोई साझा रुख तैयार कर पाते हैं या नहीं।
BRICS Summit 2026: क्या दिल्ली से सच में युद्धविराम हो सकता है?
यहां एक फर्क समझना जरूरी है।
BRICS स्वयं कोई सैन्य गठबंधन या ऐसा अंतरराष्ट्रीय निकाय नहीं है जो युद्धविराम लागू कर सके। इसलिए दिल्ली Summit से सीधे ceasefire घोषित हो जाएगा, ऐसा मानना जल्दबाजी होगी।
लेकिन BRICS तीन स्तरों पर भूमिका निभा सकता है—नेताओं के बीच सीधी बातचीत, साझा राजनीतिक संदेश और पर्दे के पीछे diplomatic engagement।
भारत, रूस और चीन तीनों के ईरान से संबंध हैं। वहीं भारत के अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों से भी मजबूत संबंध हैं। इस कारण नई दिल्ली संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण diplomatic platform बन सकती है।
हालांकि Reuters के मुताबिक BRICS के भीतर ईरान और UAE को लेकर मौजूद मतभेद इतने गंभीर हैं कि संयुक्त बयान की भाषा तय करना भी कठिन चुनौती बन चुका है। इसलिए युद्धविराम की संभावना से ज्यादा व्यावहारिक लक्ष्य फिलहाल तनाव कम करने और बातचीत की जमीन तैयार करने का है।
BRICS Summit 2026: मोदी-पेजेश्कियन बातचीत पर क्यों रहेगी खास नजर?
प्रधानमंत्री मोदी और मसूद पेजेश्कियन की बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने अब तक इस संघर्ष में diplomacy और de-escalation पर जोर दिया है।
SCO Summit में मोदी ने पेजेश्कियन से बातचीत के दौरान lasting peace और stability के लिए प्रयास जारी रखने की बात कही थी। भारत ने shipping routes और commercial navigation की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया था।
मिडिल ईस्ट संघर्ष का प्रभाव सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। Strait of Hormuz में तनाव ने वैश्विक तेल व्यापार को प्रभावित किया है और crude oil prices भी दबाव में हैं। Reuters के मुताबिक मौजूदा संघर्ष के कारण Hormuz से oil movement गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए इस क्षेत्र में स्थिरता सीधे आर्थिक हितों से भी जुड़ी है।
BRICS Summit 2026: रूस और चीन की भूमिका भी होगी अहम
ईरान के साथ रूस और चीन दोनों के करीबी रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं।
इसी वजह से BRICS Summit 2026 में पुतिन और शी जिनपिंग की भूमिका पर भी नजर रहेगी। अगर भारत, रूस और चीन क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए किसी साझा diplomatic formulation पर सहमत होते हैं तो ईरान के साथ आगे की बातचीत में इसका राजनीतिक महत्व हो सकता है।
लेकिन BRICS के सभी देशों की विदेश नीति एक जैसी नहीं है। AP के मुताबिक विस्तारित BRICS के भीतर ईरान, यूक्रेन और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को लेकर अलग-अलग प्राथमिकताएं हैं। यही विविधता किसी एक कठोर geopolitical position पर सहमति को मुश्किल बनाती है।
BRICS Summit 2026: दिल्ली में दुनिया के कई बड़े नेता
इस बार BRICS Summit में सिर्फ पुतिन, पेजेश्कियन और जिनपिंग ही नहीं, बल्कि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई नेता हिस्सा ले रहे हैं। UN Secretary-General Antonio Guterres भी दिल्ली पहुंचे हैं।
BRICS अब 11 सदस्य देशों वाला विस्तारित समूह है और इसके साथ 10 partner countries भी जुड़ी हुई हैं।
इससे दिल्ली में होने वाली बातचीत का दायरा सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि Ukraine, Middle East, global governance, supply chains और international financial architecture जैसे मुद्दे भी एजेंडे में रहेंगे।
BRICS Summit 2026 की बड़ी बातें
- 18वां BRICS Summit नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होगा।
- ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन दिल्ली पहुंच चुके हैं।
- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे।
- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर को आएंगे और यह सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा होगी।
- भारत और चीन मोदी-शी bilateral meeting की व्यवस्था पर काम कर रहे हैं।
- पश्चिम एशिया का युद्ध Summit के सबसे बड़े geopolitical मुद्दों में शामिल रहेगा।
- भारत dialogue और diplomacy के जरिए तनाव कम करने की वकालत करता रहा है।
- BRICS में ईरान और UAE के मतभेद संयुक्त declaration तैयार करने को मुश्किल बना रहे हैं।
- Delhi Summit सीधे युद्धविराम लागू नहीं कर सकता, लेकिन diplomatic dialogue के लिए मंच उपलब्ध करा सकता है।
क्या BRICS से मिलेगी शांति की दिशा?
कुल मिलाकर BRICS Summit 2026 ऐसे समय हो रहा है जब रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट संघर्ष दोनों वैश्विक राजनीति पर भारी पड़े हुए हैं। पुतिन, पेजेश्कियन, जिनपिंग और मोदी जैसे नेताओं का एक ही मंच पर मौजूद होना स्वाभाविक रूप से कूटनीतिक संभावनाएं बढ़ाता है।
लेकिन दिल्ली से तत्काल ceasefire की घोषणा की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। अधिक महत्वपूर्ण यह होगा कि BRICS के सदस्य तनाव कम करने, बातचीत शुरू कराने और पश्चिम एशिया पर कोई साझा भाषा तैयार करने में कितनी सफलता हासिल करते हैं।
अगर ऐसा होता है तो नई दिल्ली का यह Summit युद्ध रोकने का अंतिम समाधान भले न बने, लेकिन आगे की diplomacy के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता जरूर खोल सकता है।
BRICS की आधिकारिक जानकारी के लिए BRICS 2026 Official Website और भारत की Iran policy से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए PIB: Modi-Pezeshkian SCO Meeting देख सकते हैं। The News Canvas अन्य अंतरराष्ट्रीय खबरों के लिए पढ़ें।

