दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट आज सिर्फ पर्वतारोहण की वजह से नहीं, बल्कि पर्यावरणीय खतरे को लेकर भी चर्चा में है।
एक नई स्टडी में एवरेस्ट बेस कैंप पर बढ़ते मानवीय दबाव को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक क्लाइंबिंग सीजन के दौरान हजारों लोगों की मौजूदगी, बढ़ता टूरिज्म, ईंधन का इस्तेमाल और मानवीय गतिविधियां ग्लेशियर क्षेत्र पर असर डाल रही हैं।
क्या सच में एवरेस्ट पर इंसानों की मौजूदगी बर्फ पिघलने की वजह बन रही है?
क्या 6000 लीटर से ज्यादा रोजाना जमा होने वाला यूरिन ग्लेशियर के लिए खतरा है?
या फिर इसके पीछे सबसे बड़ा कारण Climate Change है?
