Ministry of Ayush IndiaAI MoU: MoU के तहत आयुष क्षेत्र के योग्य Research Datasets, AI Models और Toolkits को AIKosh से जोड़ा जाएगा। शोधकर्ताओं को रियायती दरों पर GPU और High-Performance Computing सुविधाएं भी मिल सकेंगी।
नई दिल्ली। आयुष मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के IndiaAI Mission ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में Artificial Intelligence आधारित शोध और नवाचार बढ़ाने के लिए एक Memorandum of Understanding यानी MoU पर हस्ताक्षर किए हैं।
समझौते का उद्देश्य Ayurveda, Yoga, Naturopathy, Unani, Siddha, Sowa-Rigpa और Homoeopathy से जुड़े शोध, औषधीय पौधों, औषधि प्रशासन, ज्ञान प्रबंधन और क्षमता निर्माण में AI तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाना है। इसके अंतर्गत आयुष मंत्रालय को IndiaAI के AIKosh Platform और रियायती Computing Infrastructure से भी जोड़ा जाएगा।
आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी डॉ. कविता जैन और IndiaAI Mission के Chief Operating Officer तथा MeitY के संयुक्त सचिव सुदीप श्रीवास्तव ने 31 जुलाई 2026 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम में दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

आयुष क्षेत्र में AI का कहां होगा इस्तेमाल?
Ministry of Ayush IndiaAI MoU के तहत AI को चार प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ावा देने की योजना है:
- Evidence-Based Research
- औषधीय पौधों से जुड़ा अध्ययन
- Drug Administration
- Training और Capacity Building
आयुष मंत्रालय के अनुसार AI के इस्तेमाल से बड़े Research Datasets का विश्लेषण, पुराने शोध दस्तावेजों का वर्गीकरण, जानकारियों के बीच संबंध खोजने और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी निष्कर्ष तैयार करने में मदद मिल सकती है।
डॉ. कविता जैन ने कहा कि आयुष और Artificial Intelligence का एकीकरण साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, Knowledge Management और Innovation के नए अवसर पैदा करेगा। उनके मुताबिक IndiaAI के साथ सहयोग आयुष प्रणाली को अधिक Technology-Driven और भविष्य के लिए तैयार बनाने में सहायता करेगा।
AIKosh से जुड़ेगा आयुष मंत्रालय
समझौते का एक प्रमुख हिस्सा आयुष मंत्रालय को AIKosh Platform से जोड़ना है। मंत्रालय अपने योग्य Health Research Artefacts को इस राष्ट्रीय मंच पर उपलब्ध करा सकेगा।
इन Research Artefacts में शामिल हो सकते हैं:
- Research Datasets
- Dataset Metadata
- AI Models
- Toolkits
- संबंधित Use Cases
सरकार का कहना है कि इससे शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, Startup कंपनियों और Technology Developers को पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े AI Solutions विकसित करने के लिए बेहतर संसाधन मिल सकेंगे। केवल निर्धारित पात्रता और साझा किए जाने योग्य सामग्री ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएगी।
AIKosh को AI-Ready Datasets, Models, Toolkits और दूसरे Development Resources के राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं और Developers को प्रमाणिक तथा संरचित संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि वे AI आधारित Applications तैयार कर सकें।
पारंपरिक चिकित्सा के Datasets से समृद्ध होगा AIKosh
सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि आयुष मंत्रालय के साथ हुआ समझौता AIKosh को पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित Datasets से समृद्ध करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उनके अनुसार आधुनिक तकनीक को भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से जोड़ने पर शोधकर्ताओं और चिकित्सकों को नई खोज तथा Innovation करने में सहायता मिल सकती है। इससे AI Models को केवल सामान्य Health Data के बजाय आयुष से संबंधित विशेष जानकारियों पर विकसित और परखा जा सकेगा।
यहां Dataset की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होगी। पारंपरिक चिकित्सा में अलग-अलग पद्धतियों, शब्दावली और उपचार पद्धतियों का Standardisation चुनौतीपूर्ण हो सकता है। AI Model के परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि उसके प्रशिक्षण में इस्तेमाल की गई जानकारी कितनी प्रमाणिक, संरचित और प्रतिनिधित्वपूर्ण है।
रियायती दरों पर मिलेगी GPU सुविधा
इस सहयोग के अंतर्गत आयुष क्षेत्र के पात्र शोधकर्ताओं और परियोजनाओं को IndiaAI Initiative के माध्यम से GPU आधारित तथा High-Performance Computing Infrastructure उपलब्ध कराने की योजना है।
यह सुविधा निर्धारित Service-Level Agreements और पात्रता शर्तों के अंतर्गत रियायती दरों पर दी जाएगी। शक्तिशाली Computing Infrastructure बड़े Datasets पर AI Models को Train करने, Research Analytics चलाने और जटिल Healthcare Applications विकसित करने के लिए आवश्यक होता है।
IndiaAI Compute का उद्देश्य Academia, Researchers, Startups, MSMEs, सरकारी संस्थाओं और Industry को कम लागत पर Cloud आधारित AI Computing Resources उपलब्ध कराना है।
इस व्यवस्था से छोटे आयुष संस्थानों और शोधकर्ताओं के लिए भी उन्नत AI Research करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, जिन्हें अपने स्तर पर महंगे GPU Servers स्थापित करने में कठिनाई होती है।
Ayush Grid की भूमिका
MoU को आयुष मंत्रालय के व्यापक Digital Transformation Programme Ayush Grid से भी जोड़ा गया है। Ayush Grid पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र के लिए Digital Public Health Infrastructure के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इसके अंतर्गत Health Services, Education, Research, Medicinal Plants, Drug Administration और Public Outreach को Digital Platforms के माध्यम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसका प्रमुख हिस्सा My Ayush Integrated Services Portal यानी MAISP है, जिसे आयुष से जुड़ी सेवाओं के Unified Digital Gateway के रूप में तैयार किया गया है।
Ayush Grid के OSD नमन गोयल ने कहा कि Emerging Technologies Component के तहत AI आधारित Platforms विकसित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार IndiaAI के साथ हुआ समझौता आयुष क्षेत्र में Artificial Intelligence को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।
पहले से विकसित हो रहे AI आधारित आयुष Tools
आयुष मंत्रालय इससे पहले भी AI आधारित कई Digital Applications प्रदर्शित कर चुका है। फरवरी 2026 में आयोजित India–AI Impact Summit में मंत्रालय ने AI Chatbots और Yoga Posture AI जैसे Tools प्रस्तुत किए थे।
Yoga Posture AI में Computer Vision की मदद से योगासन की स्थिति का विश्लेषण कर उपयोगकर्ता को आसन की शुद्धता और सुरक्षा से संबंधित संकेत देने की क्षमता प्रदर्शित की गई थी। AI Chatbots को नागरिकों, चिकित्सकों और संस्थानों को जानकारी तथा Digital Services तक पहुंचने में सहायता देने के लिए विकसित किया जा रहा है।
मंत्रालय ने Clinical Decision Support, Standardisation, Research Analytics और Public Health Outreach में AI के संभावित उपयोगों पर भी काम किए जाने की जानकारी दी थी। IIT Jodhpur Centre of Excellence से जुड़े शोध भी Digital Health, AI और पारंपरिक चिकित्सा के आपसी संबंधों पर केंद्रित हैं।
औषधीय पौधों के क्षेत्र में क्या हो सकता है फायदा?
भारत में हजारों औषधीय पौधों और उनसे जुड़ी पारंपरिक जानकारियों के दस्तावेज मौजूद हैं। AI आधारित Image Recognition और Data Analysis के माध्यम से भविष्य में पौधों की पहचान, उनकी भौगोलिक उपलब्धता, गुणवत्ता और Supply Chain से संबंधित अध्ययन में मदद मिल सकती है।
हालांकि मौजूदा MoU में किसी विशेष Medicinal Plant Identification Application की घोषणा नहीं की गई है। समझौते में औषधीय पौधों को AI Collaboration के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। किसी वास्तविक Application को लागू करने से पहले Field Validation और वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक होंगे।
क्या AI मरीजों का इलाज या दवा निर्धारित करेगा?
यह MoU किसी AI System को स्वतंत्र रूप से बीमारी का निदान करने, दवा लिखने या चिकित्सक का स्थान लेने की अनुमति नहीं देता। यह मुख्य रूप से Research, Data Sharing, Computing Resources और Innovation को बढ़ावा देने वाला सहयोगात्मक ढांचा है।
AI आधारित Clinical Tool विकसित होने की स्थिति में उसकी वैज्ञानिक प्रमाणिकता, सुरक्षा, Data Privacy और संबंधित Regulatory Requirements की अलग से जांच करनी होगी। मरीजों से जुड़े संवेदनशील Health Data को साझा करने से पहले Consent, Anonymisation, Cybersecurity और कानून के अनुरूप इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा।
सरकारी बयान में AIKosh पर केवल Eligible Health Research Artefacts साझा करने और AI Solutions के जिम्मेदार विकास की बात कही गई है।
अवसर के साथ कई चुनौतियां भी
पारंपरिक चिकित्सा में Artificial Intelligence का इस्तेमाल शोध की गति बढ़ा सकता है, लेकिन इससे कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी जुड़ी हैं।
सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध Research Data की गुणवत्ता और Standardisation है। अलग-अलग संस्थानों में इस्तेमाल होने वाली शब्दावली, उपचार विधियों और Patient Records के स्वरूप में अंतर होने पर AI Model के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
दूसरी चुनौती Clinical Validation की है। किसी AI Model द्वारा खोजे गए Pattern को चिकित्सा तथ्य मानने से पहले नियंत्रित वैज्ञानिक अध्ययन और विशेषज्ञ समीक्षा जरूरी होगी।
इसके अलावा पारंपरिक ज्ञान के Intellectual Property Rights, स्थानीय समुदायों के ज्ञान की सुरक्षा और व्यावसायिक इस्तेमाल से मिलने वाले लाभ का उचित वितरण भी महत्वपूर्ण विषय होंगे।
क्या बदलेगा इस समझौते से?
इस MoU का तत्काल परिणाम किसी नई दवा, उपचार या Patient Application के रूप में सामने नहीं आएगा। इसका सबसे पहला प्रभाव Digital Infrastructure, Research Dataset Sharing, AI Model Development और Researchers की Computing Access पर दिखाई दे सकता है।
यदि समझौते को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो आयुष से जुड़े संस्थानों के बीच Research Collaboration बढ़ सकता है। प्रमाणिक और मानकीकृत Datasets उपलब्ध होने पर Startups तथा Academic Institutions पारंपरिक चिकित्सा के लिए नए AI Tools विकसित कर सकेंगे।
अंतिम सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि साझा किए गए Datasets कितने उपयोगी और विश्वसनीय हैं, AI Models की स्वतंत्र जांच किस प्रकार होती है और नागरिकों की Health तथा Privacy को सुरक्षित रखने के लिए कौन-से नियम लागू किए जाते हैं।




