नाइजर के राष्ट्रपति जनरल अब्दुर्रहमान त्चियानी ने दावा किया कि नियामी हवाईअड्डे पर हमला करने वाले JNIM लड़ाकों को फ्रांस ने संगठित और प्रशिक्षित किया। हालांकि उन्होंने अपने आरोप के समर्थन में कोई सार्वजनिक रूप से सत्यापित प्रमाण पेश नहीं किया है।
नियामी। नाइजर के राष्ट्रपति एवं सैन्य शासक जनरल अब्दुर्रहमान त्चियानी ने राजधानी नियामी के डियोरी हमानी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर 18 जून को हुए घातक हमले के पीछे फ्रांस का हाथ होने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि हमले में शामिल लड़ाकों को फ्रांसीसी एजेंसियों ने एकत्र किया, प्रशिक्षण दिया और हवाईअड्डे को पूरी तरह नष्ट करने के निर्देश दिए थे।
त्चियानी ने नाइजर के सरकारी प्रसारक पर प्रसारित एक लंबे साक्षात्कार में यह आरोप लगाया। स्थानीय समाचार पोर्टल ActuNiger के अनुसार यह बातचीत 25 जुलाई की शाम प्रसारित हुई थी। इसमें त्चियानी ने जनवरी और जून 2026 में हवाईअड्डे पर हुए दोनों हमलों को फ्रांस तथा व्यापक रूप से पश्चिमी देशों से जोड़ने का प्रयास किया।
हालांकि Niger France Row से जुड़े इन आरोपों की किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या अंतरराष्ट्रीय संस्था ने पुष्टि नहीं की है। फ्रांस के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में त्चियानी ने सार्वजनिक रूप से जांच दस्तावेज, खुफिया रिपोर्ट या दूसरे सत्यापन योग्य प्रमाण जारी नहीं किए हैं।
JNIM लड़ाकों को प्रशिक्षित करने का दावा
त्चियानी ने कहा कि जून में हवाईअड्डे पर हमला करने वाले लड़ाकों की भर्ती अल-कायदा से संबद्ध जमाअत नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन यानी JNIM से की गई थी। उनके अनुसार इन लड़ाकों को कथित रूप से फ्रांस ने एकत्र किया और हमले के लिए तैयार किया।
उन्होंने हमलावरों को विदेशी शक्तियों के लिए काम करने वाले “भाड़े के लड़ाके” बताया। त्चियानी का दावा था कि उनका मुख्य उद्देश्य हवाईअड्डे और उसके सैन्य प्रतिष्ठानों को पूरी तरह नष्ट करना था। उन्होंने यात्रियों को निशाना बनाए जाने की योजना का भी आरोप लगाया, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
JNIM ने 18 जून के हमले की जिम्मेदारी ली थी। यह संगठन अल-कायदा से संबद्ध है और माली, बुर्किना फासो तथा नाइजर सहित साहेल क्षेत्र के कई हिस्सों में सक्रिय है।
हमले में 13 लोगों की हुई थी मौत
18 जून की सुबह हथियारबंद हमलावरों ने नियामी के डियोरी हमानी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे और उससे जुड़े सैन्य क्षेत्र में घुसने की कोशिश की थी। नाइजर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार हमले में 11 सुरक्षाकर्मी और दो नागरिक मारे गए, जबकि चार लोग घायल हुए थे।
सुरक्षा बलों ने 22 हमलावरों को मार गिराने और करीब 20 संदिग्धों को हिरासत में लेने का दावा किया था। मौके से AK-47 राइफलें, रॉकेट चालित ग्रेनेड लॉन्चर, मशीनगन, हथगोले, संचार उपकरण और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बरामद करने की जानकारी दी गई थी।
हमलावर कथित तौर पर टैक्सियों और अन्य शहरी वाहनों में सवार होकर हवाईअड्डा क्षेत्र तक पहुंचे थे। नाइजर सरकार ने कहा था कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई के कारण हमलावर मुख्य यात्री टर्मिनल तक नहीं पहुंच पाए। हमले के कुछ घंटों बाद हवाईअड्डे पर सामान्य संचालन बहाल होने का दावा किया गया था।
तीन ठिकानों को एक साथ निशाना बनाने का आरोप
त्चियानी के मुताबिक हमलावर केवल हवाईअड्डे को निशाना नहीं बनाना चाहते थे। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति भवन और टोंडिबिया स्थित सैन्य प्रशिक्षण केंद्र पर भी एक साथ हमले की योजना तैयार की गई थी।
उनका कहना था कि राष्ट्रपति आवास और प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाने के लिए तैयार दूसरे समूहों को हमले से एक दिन पहले गिरफ्तार कर लिया गया था। इस कथित साजिश और गिरफ्तारियों के बारे में स्वतंत्र मीडिया या किसी अंतरराष्ट्रीय जांच संस्था से विस्तृत सत्यापन सामने नहीं आया है।
इसलिए राष्ट्रपति भवन और सैन्य प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाने की कथित योजना को फिलहाल नाइजर के राष्ट्रपति के दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
इस साल दूसरी बार निशाना बना एयरपोर्ट
डियोरी हमानी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर 2026 में यह दूसरा बड़ा हमला था। इससे पहले 28 और 29 जनवरी की दरमियानी रात हवाईअड्डे तथा उसके भीतर स्थित एयरबेस पर भारी हथियारों और ड्रोन की मदद से हमला हुआ था।
जनवरी के हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट के साहेल संगठन ने ली थी। उस समय भी त्चियानी ने फ्रांस, बेनिन और आइवरी कोस्ट के नेतृत्व पर हमले को प्रायोजित करने का आरोप लगाया था, लेकिन स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए थे। बेनिन सरकार ने उस आरोप को खारिज कर दिया था।
जनवरी और जून के हमलों की जिम्मेदारी अलग-अलग चरमपंथी संगठनों ने ली थी। जनवरी का हमला इस्लामिक स्टेट से संबद्ध संगठन ने स्वीकार किया था, जबकि जून के हमले का दावा अल-कायदा से जुड़े JNIM ने किया।
रणनीतिक रूप से अहम है नियामी एयरपोर्ट
डियोरी हमानी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा केवल नागरिक उड़ानों का केंद्र नहीं है। परिसर में नाइजर की वायुसेना का सैन्य अड्डा भी मौजूद है। यहां नाइजर, माली और बुर्किना फासो के गठबंधन की संयुक्त सैन्य व्यवस्था से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित होती हैं।
इसी रणनीतिक भूमिका के कारण सुरक्षा विशेषज्ञ हवाईअड्डे को चरमपंथी संगठनों के लिए प्रतीकात्मक और सैन्य रूप से महत्वपूर्ण लक्ष्य मानते हैं। जून का हमला यह भी दिखाता है कि साहेल में सक्रिय सशस्त्र संगठन अब दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों के साथ राजधानी और बड़े शहरी ठिकानों तक पहुंचने की क्षमता प्रदर्शित कर रहे हैं।
फ्रांस और नाइजर के संबंधों में तनाव
जुलाई 2023 के सैन्य तख्तापलट के बाद नाइजर और फ्रांस के संबंध लगातार खराब हुए हैं। सैन्य सरकार ने फ्रांसीसी सैनिकों को देश छोड़ने के लिए कहा और सुरक्षा सहयोग में रूस की ओर झुकाव बढ़ाया।
फ्रांस ने नियामी स्थित अपना दूतावास भी अनिश्चितकाल के लिए बंद कर रखा है और अपने नागरिकों को नाइजर की यात्रा नहीं करने की सलाह दी है। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय का कहना है कि देश में आतंकी हमलों और अपहरण का खतरा उच्च स्तर पर बना हुआ है।
इस राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण नाइजर का सैन्य नेतृत्व देश में होने वाली सुरक्षा घटनाओं के लिए बार-बार फ्रांस और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को जिम्मेदार ठहराता रहा है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में इन आरोपों को प्रमाणित न होने के कारण सावधानी से प्रस्तुत किया गया है।
आरोप और प्रमाण के बीच अंतर जरूरी
Niger France Row में त्चियानी के आरोप गंभीर हैं, लेकिन इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। जून के हवाईअड्डा हमले का होना, उसमें 13 लोगों की मौत और JNIM द्वारा जिम्मेदारी लिया जाना विभिन्न स्रोतों से पुष्ट है। लेकिन लड़ाकों को फ्रांस द्वारा भर्ती, प्रशिक्षित और निर्देशित किए जाने का दावा स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुआ है।
इस ताजा आरोप पर फ्रांस की विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद विवाद की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल घटनाक्रम नाइजर में बढ़ती जिहादी हिंसा के साथ फ्रांस और साहेल की सैन्य सरकारों के बीच गहराते कूटनीतिक टकराव को भी दिखाता है।




