Rajasthan UP School Entry Ban: राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बिना पूर्व अनुमति बाहरी लोगों के प्रवेश और फोटो-वीडियोग्राफी से जुड़े प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने प्रिया मिश्रा की ओर से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। मामला Priya Mishra v. Union of India & Ors., W.P.(C) No. 1095/2026 के रूप में दर्ज था।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश के आदेशों को उनकी वैधता के आधार पर विस्तार से जांचकर “सही” या “संवैधानिक” घोषित नहीं किया है। अदालत ने केवल अनुच्छेद 32 के तहत इस PIL को entertain करने से इनकार किया है। यानी इसे सीधे यह कहना कि सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल एंट्री restrictions को “uphold” कर दिया, अधिक व्यापक निष्कर्ष होगा।

Rajasthan UP School Entry Ban पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
Rajasthan UP School Entry Ban मामले में पीठ ने संक्षिप्त रूप से कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता को इस PIL में मांगी गई राहत नहीं मिली।
याचिका में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के उन निर्देशों को चुनौती दी गई थी जिनमें सरकारी स्कूलों में outsiders, journalists, YouTubers, social-media users और civil-society representatives के प्रवेश तथा photography, videography, interviews, audio recording और livestreaming को पूर्व अनुमति से जोड़ा गया है।
Rajasthan UP School Entry Ban: राजस्थान में क्या है 16 अगस्त का आदेश?
राजस्थान में विवाद 16 अगस्त 2026 को माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से जारी circular को लेकर था।
इसमें किसी बाहरी व्यक्ति को सरकारी स्कूल परिसर में प्रवेश करने से पहले principal की अनुमति लेना जरूरी किया गया। इसके अलावा school परिसर में photography, videography, interview, audio recording या livestreaming के लिए भी पहले से लिखित अनुमति की व्यवस्था की गई।
इसलिए आदेश को पूर्ण रूप से “हर बाहरी व्यक्ति की एंट्री पर बैन” कहना पूरी तरह सटीक नहीं होगा। इसका मुख्य प्रावधान बिना अनुमति प्रवेश और रिकॉर्डिंग पर रोक से जुड़ा है।
UP के आदेश को भी दी गई थी चुनौती
Rajasthan UP School Entry Ban PIL में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 19 अगस्त 2026 को जारी निर्देश का भी उल्लेख किया गया।
उस आदेश के मुताबिक outsiders, YouTubers और social-media से जुड़े लोगों को competent authority की अनुमति के बिना परिषदीय स्कूलों में प्रवेश करने या photo-video बनाने की अनुमति नहीं होगी। याचिका में दावा किया गया कि आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा जैसे जिलों में भी इसी तरह के निर्देश जारी हुए।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच पहुंचा था मामला SC
यह कानूनी विवाद Cockroach Janata Party यानी CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की पृष्ठभूमि में सामने आया था। CJP सरकारी स्कूलों में भवन, कक्षाओं और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर अभियान चला रही है।
याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से तर्क दिया गया था कि बच्चों की privacy, dignity और safety की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसे सरकारी स्कूलों की भौतिक स्थिति के public-interest documentation पर व्यापक प्रतिबंध लगाने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
बच्चों और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर की रिकॉर्डिंग में अंतर का तर्क
याचिका में खास तौर पर यह अंतर सामने रखा गया था कि किसी identifiable बच्चे की तस्वीर या वीडियो रिकॉर्ड करना अलग विषय है, जबकि सरकारी स्कूल की:
- इमारत
- कक्षाओं
- शौचालय
- पेयजल व्यवस्था
- बिजली व्यवस्था
- Mid-Day Meal
- अन्य infrastructure
की स्थिति record करना अलग विषय है।
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि जनहित में स्कूलों की बुनियादी स्थिति document करने पर blanket restriction नहीं लगाया जाना चाहिए।
किन मौलिक अधिकारों का दिया गया हवाला?
Rajasthan UP School Entry Ban के खिलाफ दायर याचिका में संविधान के Article 14, 19(1)(a), 19(1)(g), 21 और 21-A का हवाला दिया गया था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि freedom of speech and expression में legitimate journalism और public institutions की स्थिति से संबंधित जानकारी लोगों तक पहुंचाने का अधिकार भी शामिल है। साथ ही याचिका ने यह भी स्वीकार किया था कि बच्चों की privacy और safety सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
याचिका में मांग की गई थी कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश के आदेशों को उस सीमा तक रद्द किया जाए जहां वे public-interest documentation पर व्यापक प्रतिबंध लगाते हैं और किसी भी restriction को reasonableness, necessity तथा proportionality की कसौटी पर परखा जाए।
क्या अब राजस्थान-UP के आदेश जारी रहेंगे?
सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं मिलने के बाद challenged orders पर इस PIL के जरिए कोई रोक नहीं लगी है। इसलिए संबंधित प्रशासनिक निर्देश फिलहाल प्रभावित नहीं हुए हैं।
हालांकि इसे यह नहीं समझना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद हर restriction की संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला दे दिया है। उपलब्ध आदेश/रिपोर्टिंग के मुताबिक अदालत ने Article 32 वाली इस writ petition को entertain नहीं किया।
Rajasthan UP School Entry Ban की बड़ी बातें
- राजस्थान और UP के school-entry restrictions के खिलाफ PIL सुप्रीम कोर्ट पहुंची।
- याचिका प्रिया मिश्रा ने दायर की थी।
- सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने की।
- कोर्ट ने Article 32 के तहत याचिका पर विचार करने से इनकार किया।
- राजस्थान का संबंधित circular 16 अगस्त 2026 का है।
- इसमें outsiders की entry के लिए prior permission जरूरी की गई।
- Photo, video, interview, audio recording और livestreaming के लिए भी written permission जरूरी है।
- UP में अयोध्या का संबंधित निर्देश 19 अगस्त को जारी हुआ था।
- याचिका में कई अन्य UP जिलों में समान निर्देश होने का दावा किया गया।
- PIL ने Articles 14, 19, 21 और 21-A के उल्लंघन का तर्क दिया था।
- मामला CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की पृष्ठभूमि में चर्चा में आया।
- सुप्रीम कोर्ट ने restrictions की merits पर विस्तृत संवैधानिक फैसला नहीं सुनाया।
Rajasthan UP School Entry Ban: अब क्या?
कुल मिलाकर Rajasthan UP School Entry Ban मामले में याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में outsiders की entry और recording को prior permission से जोड़ने वाले निर्देश इस PIL से अप्रभावित रहे हैं।
Rajasthan UP School Entry Ban इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु यही है कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को Article 32 के तहत entertain करने से मना किया है; अदालत ने उपलब्ध रिपोर्टिंग में school-entry rules की merits पर कोई विस्तृत फैसला नहीं दिया।
सुप्रीम कोर्ट के मामलों और आदेशों के लिए Supreme Court of India की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है। Supreme Court की official latest-orders listing में भी Priya Mishra v. Union of India, W.P.(C) 1095/2026 दर्ज है।
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