Supreme Court Media Reporting को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि उसके हालिया अंतरिम आदेश का उद्देश्य मीडिया की कोर्ट रिपोर्टिंग पर रोक लगाना नहीं है। मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान पहले की तरह न्यायालय की कार्यवाही और फैसलों की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं। हालांकि, अदालत की कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो क्लिप का उपयोग बिना पूर्व अनुमति नहीं किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके आदेश को मीडिया रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। यह स्पष्टीकरण इसलिए जारी किया गया क्योंकि पिछले आदेश को लेकर विभिन्न स्तरों पर भ्रम की स्थिति बन गई थी।

Supreme Court Media Reporting पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
Supreme Court Media Reporting को स्पष्ट करते हुए मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि अदालत की कार्यवाही की तथ्यात्मक और निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।
मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान—
- कोर्ट की सुनवाई की रिपोर्ट प्रकाशित कर सकते हैं।
- न्यायिक फैसलों की जानकारी जनता तक पहुंचा सकते हैं।
- कानूनी घटनाक्रम पर समाचार प्रसारित कर सकते हैं।
लेकिन किसी भी रिपोर्ट में अदालत की लाइव कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो क्लिप का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जब तक कि संबंधित प्राधिकरण से अनुमति न मिल जाए।
31 जुलाई के आदेश पर क्यों देना पड़ा स्पष्टीकरण?
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि 31 जुलाई को जारी आदेश के बाद कई जगह यह धारणा बन गई थी कि मीडिया अब अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग नहीं कर सकेगा।
इसी भ्रम को दूर करने के लिए अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश केवल ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के उपयोग से संबंधित है, न कि समाचार रिपोर्टिंग से।
Supreme Court Media Reporting में ऑडियो-वीडियो क्लिप पर क्यों लगी रोक?
24 जुलाई को जारी अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए कई निर्देश जारी किए थे।
इन निर्देशों के अनुसार बिना अनुमति—
- ऑडियो रिकॉर्डिंग साझा नहीं की जा सकेगी।
- वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर अपलोड नहीं किए जा सकेंगे।
- रिकॉर्डिंग को रीपोस्ट, एडिट या प्रसारित नहीं किया जा सकेगा।
- रिकॉर्डिंग से कमाई (Monetization) नहीं की जा सकेगी।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होस्ट या स्टोर करने पर भी प्रतिबंध रहेगा।
यदि किसी संस्था को रिकॉर्डिंग का उपयोग करना है, तो पहले सुप्रीम कोर्ट के सचिव-जनरल या संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी दिए निर्देश
Supreme Court Media Reporting मामले में अदालत ने केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को संबंधित मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श कर आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने और अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही सभी हाईकोर्टों से पूछा गया है कि—
- लाइव स्ट्रीमिंग के मॉडल नियमों की स्थिति क्या है?
- क्या अदालतों में निर्बाध लाइव स्ट्रीमिंग संभव है?
- रिकॉर्डिंग से जुड़े नियम कब तक लागू होंगे?
अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की है।
उस दिन केंद्र सरकार और विभिन्न हाईकोर्टों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों पर सुनवाई होगी। अदालत यह भी देखेगी कि लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग को लेकर बनाए गए नियम किस चरण में हैं।
मीडिया संस्थानों के लिए क्या मायने हैं?
इस स्पष्टीकरण के बाद मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थानों को राहत मिली है।
अब वे पहले की तरह—
- कोर्ट की कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकेंगे।
- न्यायिक फैसलों का विश्लेषण प्रकाशित कर सकेंगे।
- कानूनी मामलों की जानकारी जनता तक पहुंचा सकेंगे।
हालांकि, अदालत की वास्तविक ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग का उपयोग करने के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होगी
Supreme Court Media Reporting पर सुप्रीम कोर्ट का यह स्पष्टीकरण मीडिया और न्यायपालिका दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि समाचार रिपोर्टिंग पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, बल्कि केवल कोर्ट की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के अनधिकृत उपयोग पर रोक है। इससे न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने के साथ-साथ जनता तक सही कानूनी जानकारी पहुंचाने का रास्ता भी खुला रहेगा।




