E20 पेट्रोल को लेकर देश में बहस लगातार तेज हो रही है। सरकार E20 को ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण में कमी, किसानों की आय बढ़ाने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। दूसरी तरफ वाहन मालिक माइलेज में गिरावट, इंजन पार्ट्स पर असर और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने जैसी शिकायतें उठा रहे हैं। इसी विवाद के बीच SIAM यानी Society of Indian Automobile Manufacturers ने पेट्रोलियम मंत्रालय को भेजे एक पत्र में फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप, EGR वाल्व, एग्जॉस्ट और ईंधन के संपर्क में आने वाले अन्य पुर्जों में समस्याएं बढ़ने की आशंका जताई। बाद में SIAM ने वही पत्र वापस लेते हुए कहा कि इन आंकड़ों की पुष्टि के लिए अलग-अलग क्षेत्रों और वाहन कंपनियों से ज्यादा डेटा जुटाने की जरूरत है। इसके बाद अरविंद केजरीवाल और तहसीन पूनावाला ने आरोप लगाया कि SIAM ने सरकारी दबाव में पत्र वापस लिया। हालांकि फिलहाल इस आरोप को साबित करने वाला कोई स्वतंत्र दस्तावेजी प्रमाण सामने नहीं आया है। इस वीडियो में हम यही सवाल उठाते हैं—E20 लागू करने से पहले पुराने वाहनों पर कितनी व्यापक टेस्टिंग हुई? वास्तविक माइलेज लॉस कितना है? अलग-अलग इंजन और मौसम में इसका असर क्या है? और अगर किसी वाहन को ईंधन की वजह से नुकसान होता है, तो उसकी आर्थिक जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? देखिए The News Canvas की यह खास पड़ताल और कमेंट में बताइए—E20 पर आपको सरकार का दावा ज्यादा भरोसेमंद लगता है या SIAM का शुरुआती पत्र?




