भारत के अमीर मंदिरों से कितने घरों की रोजी-रोटी? | हिंदू-मुस्लिम रोजगार और कमाई का हिसाब! | TNC
भारत के मंदिरों में चढ़ने वाला फूल, नारियल, प्रसाद और चंदन सिर्फ आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी का जरिया भी है। आखिर भारत के मंदिरों से कितने लोगों को रोजगार मिलता है? क्या मंदिरों की अर्थव्यवस्था से सिर्फ हिंदुओं को फायदा होता है या मुस्लिम कारीगर, किसान और व्यापारी भी इससे अपनी आजीविका चलाते हैं?
इस खास रिपोर्ट में जानिए तिरुपति बालाजी मंदिर के वित्त वर्ष 2026-27 के 5,456.26 करोड़ रुपये के बजट, मंदिर से जुड़े प्रत्यक्ष रोजगार, अयोध्या राम मंदिर, वैष्णो देवी, शिरडी साईं बाबा और दूसरे धार्मिक स्थलों के आसपास चलने वाले कारोबार की आर्थिक हकीकत।
साथ ही जानिए अयोध्या के लिए फूल उगाने वाले मुस्लिम किसान नाजिम अली और साधु-संतों के लिए खड़ाऊं बनाने वाले मोहम्मद आजम के परिवार की कहानी। पूजा सामग्री, फूलों की खेती, होटल, टैक्सी, प्रसाद और हस्तशिल्प से कितने तरह के रोजगार पैदा होते हैं?
क्या भारत में मंदिरों से मिलने वाले कुल रोजगार का कोई आधिकारिक राष्ट्रीय आंकड़ा मौजूद है? मंदिर की संपत्ति, चढ़ावा, बजट और स्थानीय व्यापार में क्या अंतर है?
देखिए The News Canvas की यह आंकड़ों और प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित विशेष पड़ताल।
