प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के नेतृत्व से प्रेरित इस आंदोलन ने स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा भरी और औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के भारतीयों के दृढ़ संकल्प को सामने रखा।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) में भाग लेने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आंदोलन में शामिल लोगों के साहस और दृढ़ संकल्प को याद करते हुए कहा कि उनका योगदान हर भारतीय के लिए प्रेरणा बना रहेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने 9 अगस्त 2026 को इस संबंध में उनका संदेश जारी किया।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान महात्मा गांधी के नेतृत्व से प्रेरित था और इसने स्वतंत्रता संघर्ष को नई ऊर्जा दी। उन्होंने इसे औपनिवेशिक शासन से मुक्त होने के भारतीयों के अटूट संकल्प का प्रतीक बताया।
Narendra Modi ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लेने वाले लोगों को याद करते हुए उनके साहस को देश के लिए स्थायी प्रेरणा बताया। उन्होंने विशेष रूप से महात्मा गांधी के नेतृत्व का उल्लेख किया और कहा कि Quit India का आह्वान उस समय स्वतंत्रता आंदोलन में निर्णायक ऊर्जा लेकर आया।

प्रधानमंत्री Narendra Modi का संदेश ऐसे समय आया है जब देश 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत के 84 वर्ष पूरे होने को याद कर रहा है।
8 अगस्त 1942 को पारित हुआ था Quit India Resolution
भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ी ऐतिहासिक तारीखों को लेकर अक्सर 8 और 9 अगस्त दोनों का उल्लेख किया जाता है। इसका कारण घटनाक्रम है।
8 अगस्त 1942 को Bombay में All India Congress Committee ने Quit India Resolution पारित किया था। Nehru Archive में उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी प्रस्ताव के 8 अगस्त 1942 को पारित होने की पुष्टि करते हैं।
इसी दिन महात्मा गांधी ने AICC के Bombay Session में अपना प्रसिद्ध “Do or Die” यानी “करो या मरो” संदेश दिया। भारत सरकार के Indian Culture Portal में भी गांधी के इस ऐतिहासिक भाषण की तारीख 8 अगस्त 1942 दर्ज है।
इसलिए खबर में यह लिखना अधिक सटीक है कि 8 अगस्त को प्रस्ताव पारित हुआ और गांधी ने ‘करो या मरो’ का आह्वान किया, जबकि 9 अगस्त से आंदोलन ने व्यापक रूप लिया।
9 अगस्त को गिरफ्तार कर लिए गए गांधी और बड़े नेता
ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन को फैलने से रोकने के लिए तेजी से कार्रवाई की। 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी सहित कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ और देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय नेताओं, छात्रों, मजदूरों, किसानों और आम नागरिकों ने विरोध जारी रखा।
वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी के बाद कई स्थानों पर आंदोलन स्थानीय नेतृत्व के हाथों में चला गया। अलग-अलग जिलों में जुलूस, हड़ताल और प्रदर्शन हुए और ब्रिटिश प्रशासन ने अनेक स्थानों पर गिरफ्तारियों तथा बल प्रयोग के जरिए आंदोलन दबाने की कोशिश की।
Gowalia Tank Maidan बना इतिहास का गवाह
भारत छोड़ो आंदोलन का ऐतिहासिक प्रस्ताव Bombay के Gowalia Tank Maidan, जिसे आज August Kranti Maidan के नाम से जाना जाता है, में हुए AICC अधिवेशन से जुड़ा है। यहीं आंदोलन के आह्वान ने स्वतंत्रता संघर्ष के अंतिम बड़े जनांदोलनों में से एक को जन्म दिया।
गांधी का संदेश साफ था—भारतीयों को स्वतंत्रता के लक्ष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ना होगा। “करो या मरो” का नारा जल्द ही पूरे देश में स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बन गया।
नेतृत्व जेल में, फिर भी नहीं थमा आंदोलन
Quit India Movement की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि बड़े राष्ट्रीय नेताओं को शुरुआत में ही गिरफ्तार किए जाने के बावजूद आंदोलन देश के विभिन्न हिस्सों में जारी रहा।
Indian Culture Portal के दस्तावेज बताते हैं कि ब्रिटिश प्रशासन ने जुलूसों और सार्वजनिक बैठकों पर प्रतिबंध लगाए और बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में प्रदर्शन होते रहे।
कुछ स्थानों पर आंदोलन अहिंसक प्रदर्शन तक सीमित रहा, जबकि कई जगह ब्रिटिश प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच हिंसक टकराव भी हुए। इसलिए भारत छोड़ो आंदोलन को पूरी तरह एक ही स्वरूप में देखना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं होगा।
स्वतंत्रता संघर्ष में क्यों निर्णायक माना जाता है आंदोलन?
भारत छोड़ो आंदोलन भारत को तत्काल स्वतंत्रता देने की मांग को राष्ट्रीय राजनीतिक संघर्ष के केंद्र में ले आया। 1942 के बाद यह स्पष्ट होता गया कि ब्रिटिश शासन को लंबे समय तक उसी स्वरूप में बनाए रखना मुश्किल होगा।
हालांकि भारत को स्वतंत्रता आंदोलन के तुरंत बाद नहीं बल्कि पांच वर्ष बाद, 15 अगस्त 1947 को मिली, Quit India Movement ने स्वतंत्रता की मांग को व्यापक जनभागीदारी और निर्णायक राजनीतिक दबाव से जोड़ा।
Nehru Archive और Ministry of Culture के ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 1942 में कांग्रेस नेतृत्व ने स्वतंत्रता के लिए बड़े पैमाने पर संघर्ष का आह्वान किया और गिरफ्तारी के बावजूद आंदोलन विभिन्न क्षेत्रों में फैलता गया।
प्रधानमंत्री Narendra Modi का संदेश क्यों महत्वपूर्ण?
प्रधानमंत्री Narendra Modi का 9 अगस्त का संदेश Quit India Movement की वर्षगांठ पर स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने की परंपरा का हिस्सा है। 2025 में भी उन्होंने इसी अवसर पर आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी थी और महात्मा गांधी के नेतृत्व में उनके योगदान को याद किया था।
2026 के संदेश में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने खास तौर पर दो बातों पर जोर दिया—आंदोलन में भाग लेने वालों का साहस और औपनिवेशिक शासन से मुक्त होने का भारतीयों का दृढ़ संकल्प।
तथ्यात्मक रूप से ऐसे लिखना बेहतर होगा
मूल विवरण में कहा गया है कि भारत छोड़ो आंदोलन 8 अगस्त 1942 को शुरू किया गया था। इसे थोड़ा अधिक सटीक तरीके से इस प्रकार लिखा जा सकता है: 8 अगस्त 1942 को Bombay में AICC ने Quit India Resolution पारित किया और महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का आह्वान किया। 9 अगस्त को गांधी सहित शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी के बाद देशव्यापी विरोध और तेज हुआ।
इस कारण भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति में 8 और 9 अगस्त—दोनों तारीखों का ऐतिहासिक महत्व है।
खबर के मुख्य बिंदु
- प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 9 अगस्त को Quit India Movement के सेनानियों को श्रद्धांजलि दी।
- उन्होंने आंदोलनकारियों के साहस को हर भारतीय के लिए प्रेरणा बताया।
- 8 अगस्त 1942 को AICC ने Bombay में Quit India Resolution पारित किया।
- इसी दिन महात्मा गांधी ने “Do or Die” का आह्वान किया।
- 9 अगस्त को गांधी और कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
- नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद देश के कई हिस्सों में आंदोलन जारी रहा।




