केरल हाउस से जंतर-मंतर तक निकाले गए विरोध मार्च में छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग का मुद्दा उठाया गया। युवा कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
नई दिल्ली। भारतीय युवा कांग्रेस ने गुरुवार, 30 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में विरोध मार्च निकाला। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में कार्यकर्ता केरल हाउस से जंतर-मंतर तक पहुंचे और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
युवा कांग्रेस के अनुसार, यह प्रदर्शन 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस और सुरक्षाबलों की कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन जैसे भीड़ नियंत्रण साधनों का इस्तेमाल किया गया।
कार्रवाई का आदेश किसने दिया: उदय भानु चिब
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए उदय भानु चिब ने कहा कि गृह मंत्री को संसद में आकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश किस स्तर पर दिया गया था।
चिब ने कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है, जबकि रैपिड एक्शन फोर्स यानी RAF केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का विशेष दंगा नियंत्रण बल है। उनका तर्क था कि यदि कार्रवाई गृह मंत्री की जानकारी या निर्देश पर हुई तो राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि कार्रवाई उनकी जानकारी के बिना हुई तो यह सुरक्षा व्यवस्था और कमांड प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।
युवा कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अमित शाह को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाने और पूरे घटनाक्रम की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
राहुल गांधी की मांग के बाद सड़क पर उतरी युवा कांग्रेस
युवा कांग्रेस का Amit Shah Resignation Protest ऐसे समय आयोजित हुआ है, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी गृह मंत्री को पद से हटाने की मांग की है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय जिम्मेदार है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अमित शाह को बर्खास्त करने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाले उच्चस्तरीय आयोग से जांच कराने की मांग की। राहुल ने कहा कि गृह मंत्री कार्रवाई से अवगत थे तो वह जिम्मेदार हैं और जानकारी नहीं थी तो यह उनकी प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है।
इससे पहले राहुल गांधी ने अमित शाह को पत्र लिखकर पूछा था कि क्या उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन सहित कथित घातक बल के इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। कांग्रेस का दावा है कि घटना में कई प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए।

20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ा है विवाद
विवाद की शुरुआत 20 जुलाई को नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च से हुई थी। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन पुलिस बैरिकेडिंग के बाद सुरक्षाबलों और भीड़ के बीच टकराव हुआ।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और RAF पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया। वहीं सुरक्षाबलों से जुड़े सूत्रों ने कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, लाठीचार्ज और दूसरे उपायों का इस्तेमाल तब किया गया, जब प्रदर्शनकारियों के एक हिस्से ने बैरिकेड तोड़ने और आगे बढ़ने का प्रयास किया।
CRPF महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया था कि RAF की कार्रवाई का एक पेशेवर ‘पोस्ट-इवेंट असेसमेंट’ कराया जा रहा है। इस समीक्षा में घटनाक्रम, इस्तेमाल किए गए भीड़ नियंत्रण साधनों और कार्रवाई के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप होने की जांच की जाएगी। सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि मार्च के दौरान 47 से अधिक RAF कर्मी घायल हुए थे।
पैलेट गन पर सरकार और विपक्ष के अलग दावे
कांग्रेस और प्रदर्शनकारी पक्ष का आरोप है कि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में RAF के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर पैलेट कारतूस इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार कम से कम तीन लोगों का पैलेट जैसी चोटों के लिए अस्पतालों में इलाज हुआ।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कहा कि प्रदर्शन के दौरान कोई गोली नहीं चलाई गई और केवल आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने राहुल गांधी पर बिना पर्याप्त तथ्यों के आरोप लगाने की बात कही।
यहां ‘गोली’ और ‘पैलेट कारतूस’ के बीच तकनीकी अंतर भी विवाद का हिस्सा है। इसी कारण गोला-बारूद का आधिकारिक रिकॉर्ड और RAF की आंतरिक समीक्षा इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन के कथित इस्तेमाल से संबंधित एक अलग याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र को 20 जुलाई को तैनात RAF इकाई का गोला-बारूद रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
अदालत ने पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को मौजूदा स्वरूप में अस्पष्ट बताते हुए कहा कि पुलिस नियम कुछ असाधारण परिस्थितियों में इसके प्रयोग की अनुमति दे सकते हैं। हालांकि अदालत ने 20 जुलाई की कार्रवाई को वैध घोषित नहीं किया और न ही पैलेट के इस्तेमाल से जुड़े दावों पर अंतिम निष्कर्ष दिया। मामले में दिल्ली सरकार को घायल याचिकाकर्ताओं और समान रूप से प्रभावित अन्य लोगों का उचित इलाज सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया।
यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कार्रवाई में इस्तेमाल किए गए हथियारों और कारतूसों का रिकॉर्ड न्यायिक जांच के लिए सुरक्षित रहेगा।
संसद में भी जारी है टकराव
छात्रों पर कथित बल प्रयोग का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में भी लगातार उठ रहा है। कांग्रेस सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर गृह मंत्री से जवाब और माफी की मांग की थी। राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा था कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
राज्यसभा में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक सहित विपक्षी दलों ने अमित शाह से पैलेट गन के मुद्दे पर बयान देने की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर विपक्षी सदस्य सदन से वॉकआउट भी कर गए।
युवा कांग्रेस का ताजा मार्च उसी राजनीतिक अभियान की अगली कड़ी है। पार्टी अब इस मुद्दे को संसद के भीतर और सड़क पर एक साथ उठाने की रणनीति अपना रही है।
युवा कांग्रेस ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
युवा कांग्रेस ने अपने Amit Shah Resignation Protest के दौरान मुख्य रूप से अमित शाह की बर्खास्तगी, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच और घायल छात्रों को न्याय एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी।
संगठन का कहना है कि केवल विभागीय या आंतरिक समीक्षा पर्याप्त नहीं होगी, क्योंकि घटना में दिल्ली पुलिस, RAF और दूसरे सुरक्षा बलों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। युवा कांग्रेस ने दावा किया कि निष्पक्ष जांच के बिना कार्रवाई की जिम्मेदारी तय नहीं हो पाएगी।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी जवाबदेही
मामले में फिलहाल अलग-अलग पक्षों के परस्पर विरोधी दावे सामने हैं। कांग्रेस सुरक्षाबलों पर अत्यधिक और कथित घातक बल प्रयोग का आरोप लगा रही है। सरकार इन आरोपों को राजनीतिक और तथ्यहीन बता रही है, जबकि CRPF अपनी आंतरिक समीक्षा कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गोला-बारूद रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और कार्रवाई के आदेशों से संबंधित दस्तावेज इस विवाद की सच्चाई स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
युवा कांग्रेस ने कहा है कि छात्रों को न्याय मिलने और जिम्मेदारी तय होने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल Amit Shah Resignation Protest ने पेपर लीक से शुरू हुए छात्र आंदोलन को गृह मंत्रालय की जवाबदेही से जुड़ी बड़ी राजनीतिक बहस में बदल दिया है।




