करीब 295 किलोमीटर लंबी विद्युतीकृत रेल लाइन से खैरागढ़, कवर्धा, मुंगेली और करतला सहित कई रेल सुविधा से वंचित क्षेत्रों को कनेक्टिविटी मिलेगी। परियोजना को वर्ष 2018 में CCEA की मंजूरी मिल चुकी थी; अब संशोधित लागत और निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ की बहुप्रतीक्षित डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन परियोजना को एक बार फिर प्रशासनिक गति मिली है। नई दिल्ली स्थित रेल भवन में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे के बीच हुई बैठक में परियोजना के क्रियान्वयन और संशोधित प्रस्ताव पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार रेल मंत्री ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सहमति दी है। सांसद संतोष पांडे का कहना है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर जोन की ओर से भेजे गए लगभग ₹6,947 करोड़ के संशोधित लागत प्रस्ताव को हरी झंडी मिली है। हालांकि परियोजना से संबंधित नया विस्तृत प्रशासनिक आदेश, निर्माण समयसीमा और चरणवार बजट अभी सार्वजनिक रूप से सामने आना बाकी है।
पहली बार नहीं मिली परियोजना को मंजूरी
इस घटनाक्रम को पूरी तरह नई रेल परियोजना की पहली स्वीकृति के रूप में प्रस्तुत करना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति यानी CCEA ने 26 सितंबर 2018 को मंजूरी दी थी।
उस समय परियोजना की आधिकारिक अनुमानित लागत ₹5,950.47 करोड़ और लंबाई 294.53 किलोमीटर बताई गई थी। रेल मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़ सरकार की भागीदारी वाले Special Purpose Vehicle के माध्यम से इसे विकसित करने का निर्णय हुआ था।
मूल वायर कॉपी में वर्ष 2018 की परियोजना लागत ₹4,821 करोड़ लिखी गई है, लेकिन केंद्र सरकार की आधिकारिक 2018 की विज्ञप्ति में लागत ₹5,950.47 करोड़ दर्ज है। इसलिए वेबसाइट रिपोर्ट में आधिकारिक राशि को प्राथमिकता देना अधिक उचित है।
अब किस चीज को मिली हरी झंडी?
ताजा बैठक का मुख्य महत्व परियोजना के संशोधित वित्तीय प्रस्ताव और धरातल पर काम आगे बढ़ाने से जुड़ा दिखाई देता है। मीडिया रिपोर्टों और सांसद संतोष पांडे के बयान के अनुसार देरी के कारण परियोजना की लागत बढ़कर लगभग ₹6,947 करोड़ हो गई है और इसी पुनरीक्षित प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड के स्तर पर आगे बढ़ाया गया है।
परियोजना का विकास रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए Chhattisgarh Katghora-Dongargarh Railway Limited नामक Project SPV की परिकल्पना पहले ही की गई थी। वर्ष 2018 के मॉडल में रेल मंत्रालय, छत्तीसगढ़ सरकार और निजी हितधारकों की Equity Participation का प्रावधान था।
कहां से होकर गुजरेगी रेल लाइन?
प्रस्तावित रेल लाइन कटघोरा से शुरू होकर करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ क्षेत्र से होते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचेगी। इससे छत्तीसगढ़ के कई ऐसे क्षेत्रों को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना है, जहां अभी सीधी रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है।
केंद्र सरकार की मूल परियोजना रिपोर्ट के अनुसार इस लाइन से पांच प्रमुख जिलों को लाभ मिलेगा:
- कोरबा
- बिलासपुर
- मुंगेली
- कबीरधाम
- राजनांदगांव
नई लाइन से विशेष रूप से कवर्धा, खैरागढ़, छुईखदान, पंडरिया और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की यात्री कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग का दबाव होगा कम
डोंगरगढ़-कटघोरा रेल लाइन केवल यात्री परिवहन की परियोजना नहीं है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य माल ढुलाई के लिए वैकल्पिक कॉरिडोर तैयार करना भी है।
आधिकारिक परियोजना के अनुसार नई लाइन व्यस्त झारसुगुड़ा-नागपुर रेलखंड तक मालगाड़ियों की आवाजाही को आसान करेगी। इससे बिलासपुर, चांपा और दुर्ग जैसे अत्यधिक व्यस्त रेलवे यार्ड को बायपास करने में सहायता मिलेगी। यह रेलखंड हावड़ा-मुंबई मुख्य मार्ग का हिस्सा है, जिस पर यात्री और माल यातायात दोनों का भारी दबाव रहता है।
वर्ष 2018 के आकलन में कहा गया था कि परियोजना से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में लगभग 30 से 35 Million Tonnes Per Annum की वृद्धि हो सकती है। इससे कोयला, खनिज, औद्योगिक सामान और कृषि उत्पादों के परिवहन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।
उद्योग, व्यापार और कृषि को मिलेगा लाभ
कवर्धा, मुंगेली, करतला और खैरागढ़ जैसे क्षेत्रों में बेहतर रेल संपर्क विकसित होने से स्थानीय व्यापार और उद्योगों की परिवहन लागत कम होने की संभावना है। किसानों को धान, गन्ना, दलहन और दूसरे कृषि उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने का नया माध्यम मिल सकता है।
कबीरधाम और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर और कवर्धा क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक पहुंच बेहतर हो सकती है।
हालांकि रोजगार, उद्योग और पर्यटन पर वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि परियोजना कब शुरू होती है, कौन-कौन से स्टेशन बनते हैं और यात्री ट्रेनों का संचालन किस स्वरूप में किया जाता है।
आठ साल बाद भी क्यों शुरू नहीं हुआ निर्माण?
CCEA की स्वीकृति मिलने के बावजूद परियोजना लंबे समय तक धरातल पर नहीं उतर सकी। अलग-अलग रिपोर्टों में भूमि अधिग्रहण, राज्य सरकार की वित्तीय हिस्सेदारी, संशोधित लागत और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को देरी का कारण बताया गया है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व में परियोजना के लिए बजटीय प्रावधान भी किए थे, लेकिन बड़े स्तर पर निर्माण शुरू नहीं हो पाया। अब पुनरीक्षित लागत को स्वीकार किए जाने की जानकारी के बाद भूमि अधिग्रहण, सर्वेक्षण, पर्यावरण एवं वन मंजूरी और Tender Process आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ी है।
रेल मंत्रालय के अनुसार किसी भी बड़ी रेल परियोजना की अंतिम समयसीमा भूमि अधिग्रहण की गति, Forest Clearance, Utilities Shifting, भौगोलिक परिस्थितियों और कानून-व्यवस्था जैसे कारकों पर निर्भर करती है।
सांसद संतोष पांडे ने जताया आभार
राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे ने कहा कि वह इस परियोजना को लगातार लोकसभा और रेल मंत्रालय के सामने उठाते रहे हैं। उन्होंने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक में कहा कि रेल नेटवर्क का विस्तार केवल आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक विकास, खनिज परिवहन, कृषि विपणन, पर्यटन और क्षेत्रीय संतुलन से भी जुड़ा है।
निर्माण से पहले पूरी करनी होंगी कई प्रक्रियाएं
रेल मंत्री की सहमति के बाद भी निर्माण तत्काल शुरू हो जाना निश्चित नहीं है। परियोजना को धरातल पर लाने से पहले संशोधित लागत का विस्तृत आदेश, केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी, भूमि अधिग्रहण योजना, स्टेशन एवं Alignment का अंतिम निर्धारण और निर्माण एजेंसी का चयन करना होगा।
इसके बाद Civil Work, पुल-पुलिया, स्टेशन, Track Laying, Electrification और Signalling से संबंधित अलग-अलग Tender जारी किए जाएंगे। परियोजना की स्पष्ट समयसीमा इन्हीं प्रक्रियाओं के पूरे होने के बाद सामने आएगी।
फिलहाल डोंगरगढ़-कटघोरा रेल लाइन को मिली ताजा हरी झंडी वर्ष 2018 से लंबित परियोजना के लिए महत्वपूर्ण प्रगति है। इसका वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब संशोधित स्वीकृति के बाद बजट जारी हो और निर्माण कार्य जमीन पर शुरू हो।




