लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को चुनाव लड़ने का अधिकार है… लेकिन जब किसी छोटी पार्टी की चुनावी मौजूदगी सीमित हो और उसकी आर्थिक ताकत करोड़ों-अरबों में दिखाई दे, तो सवाल उठना भी स्वाभाविक है।
गुजरात की न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी को लेकर सामने आए वित्तीय आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। आखिर छोटी पार्टियों की फंडिंग का मॉडल क्या है? क्या ये सिर्फ राजनीतिक विकल्प हैं या फिर भारतीय चुनावी व्यवस्था में इनकी कोई बड़ी भूमिका है?
