धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ी जीत आंदोलनकारी छात्रों और युवाओं की मानी जा रही है, जिन्होंने सरकार को जवाबदेही स्वीकार करने पर मजबूर किया। विपक्ष ने संसद से सड़क तक मुद्दा उठाकर दबाव बढ़ाया, लेकिन इस आंदोलन का मुख्य चेहरा युवा ही रहे। विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मजबूत राजनीतिक मुद्दा मिला, जबकि सत्ता पक्ष को छवि का नुकसान झेलना पड़ा। प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देकर सरकार ने प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में रखा। प्रधान ने पद गंवाया, युवाओं ने नैतिक जीत हासिल की और विपक्ष को नई राजनीतिक ऊर्जा मिली।
Education Minister ने छोड़ी कुर्सी! Jantar Mantar आंदोलन का असर ?

